डीन नट्टू.. एक ऐसा नाम जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है..
'७४-'७९ से लेकर आजतक हर बिट्सियन पर राज करता यह नाम आज जीवन के बदलाव के साथ आगे बढ़ रहा है...
भले ही सर हमें पिलानी में न दिखें पर जैसा कि उन्होंने खुद कहा - "मैं यहाँ आता रहूँगा, कनॉट, ऐन्क, मंदिर.. यह सब जगह ज्यादा दूर नहीं है.. आप मुझे बिट्स से निकाल सकते हैं पर मेरे अन्दर से पिलानी को कभी नहीं !"
यह शब्द उस बिट्सियन के जिसने ३५ सालों तक लगातार और कुछ नहीं बस बिट्स ही देखा है और एक ही राह - पिलानी !
बिट्स के "साइबर पत्रकार" सही मायनों में रहे हैं वो जो कि अब से सबसे ज्यादा खलेगी..
सर को पूरे बिट्स परिवार की ओर से बहुत शुभकामनाएं अपने भावी जीवन के लिए और धन्यवाद एक अमूल्य योगदान के लिए..
सर श्रीधर महाविद्यालय के प्रति-उप कुलपति बनने जा रहे हैं जो कि पिलानी से सिर्फ १० की.मी. की ही दूरी पर है...
तो अगले मुलाक़ात तक के लिए हम सभी की तरफ से अलविदा जो कि कभी आखरी नहीं होगा..