Saturday, February 11, 2012

इग्नाईट

इग्नाईट पिलानी, अपोजी 2012 के प्रमुख इवेंट्स में से एक है| यह इस अंतरराष्ट्रीय इवेंट का बिट्स पिलानी में दूसरा संस्करण है| ए.सी.एम्. द्वारा आयोजित इस इवेंट को इस वर्ष सैमसंग स्पान्सर कर रहा है | यह एक प्रकार का गीक इवेंट है जिसमे प्रतिभागियों को कम्प्यूटिंग, नेटवर्किंग आदि क्षेत्र के किसी भी एक विषय पर प्रकाश डालना होगा| इसके लिए उन्हें 20 स्लाइड्स की एक प्रेजेंटेशन तैयार करनी होती है जिसमें प्रतिभागी को कुल 5 मिनट मिलेंगे और प्रत्येक स्लाईड स्वतः 15 सेकंड में बदल जाएगी| इवेंट में 10 - 12 प्रतिभागी भाग ले पाएँगे जिनमें से 5 बिट्सियन होँगे जो की रोचक एलिम्स के द्वारा सीधे फाइनल्स में जगह बनायेंगे| एलिम्स शनिवार (18/2 ) तक आयोजित करवाने की आशा जताई जा रही है| इसमें जजिंग लेंग्वेज एवं सी.एस.आई.एस. डिपार्टमेंट का एक सयुंक्त दल करेगा, वही फाइनल्स में डोनाल्ड कोस्टेल्लो बतौर जज उपस्थित रहेंगे| ए.सी.एम्. के साथ-साथ एच.पी.सी. भी यही आशा करता है की यह इवेंट अपने द्वितीय संस्करण में और भी सफल होगा|

ISTRIKE

बिट्स में अपोजी के दौरान आयोजित होने वाली कई रोचक व आकर्षक प्रतियोगिताओं में से एक है “iStrike” | यह एक कर्नल इवेंट है जिसे CSA एवं EEE संकाय मिलकर प्रस्तुत कर रहे हैं|

मुख्यतः इसमें प्रतियोगियों को एक ऐसे रोबोट का निर्माण करना है जो ‘ओवरहेड कैमरा’ का प्रयोग कर सही ट्रैक पर चल सके| पूरे इवेंट को दो राउंड में विभाजित किया गया है | पहले राउंड में रोबोट को निर्देशानुसार सही दिशा का चुनाव कर “T” की आकृति वाले ट्रैक पर चलना होगा| इसके आधार पर 10 टीमों का चयन दूसरे राउंड के लिए किया जायेगा जिसमें रोबोट का सामना 4x3 ग्रिड के ट्रैक से होगा |

गौरतलब है कि इस प्रतियोगिता से सम्बंधित पूरी जानकारी प्रदान करने के लिये तथा छात्रों को ‘इमेज प्रोसेसिंग एवं रोबोटिक’ के विषयों से अवगत कराने हेतु 11 व 12 फ़रवरी को एक वर्कशॉप का भी आयोजन किया जा रहा है | इस प्रतिस्पर्धा में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रतियोगी हिस्सा ले रहे हैं जिसके फलस्वरूप यह इवेंट और भी दिलचस्प हो जायेगा |

Sunday, January 29, 2012

“फाउंडर्स डे और बसंत पंचमी का भव्य आयोजन” 
शनिवार,28 जनवरी 2012, का दिन बिट्स के दूसरे सेमेस्टर के उत्सवों की श्रृंखला में अपनी अनोखी छाप छोड़ गया | मौका था 61वें फाउंडर्स डे और बसंत पंचमी का| कड़कड़ाती सर्दी को चुनौती देते हुए सरस्वती मंदिर में बसंत पंचमी की सुबह का आगाज हुआ और अगली कड़ी में पूजा ग्राउंड में “मौर्य विहार “ द्वारा सरस्वती प्रतिमा स्थापना के साथ उत्सव के अगले भाग “फाउंडर्स डे” का बिट्स ऑडिटोरियम में सायं 5 बजे से भव्य आयोजन हुआ|


बिट्स प्रशासन, छात्र संगठन-प्रशासन,अन्य गणमान्य लोगों एवं बिट्सियन जनता की उपस्थिति में 61वाँ “फाउंडर्स डे” बिट्स की गरिमा और राष्ट्र की रंगीन संस्कृति को समर्पित था|


कार्यक्रम के प्रथम भाग में कुछ कल्चरल असोसिएशन द्वारा पारंपरिक नृत्य , कला और झाकियों का प्रदर्शन किया गया| इसकी अगली कड़ी में अध्यापन अतिरिक्त सेवाओं से सेवानिवृत हो रहे कर्मचारियों का सम्मान प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर बिट्स प्रशासन ने आभार प्रकट किया| इनमें अधिकांश कर्मचारी बिट्स में अपनी रजत जयंती और कुछ 40 बसंत देख चुके थे|


इसके उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने फिर से मनोरंजन और संस्कृति का समां बाँधा|


कार्यक्रम के बीच में अपोजी 2012 की विभिन्न गतिविधियों के बारे में भी बताया गया | कार्यक्रम सुखद अनुभव के साथ 7:45 पर समाप्त हुआ| गौरतलब है की “फाउंडर्स डे” बिट्स का वार्षिकोत्सव है और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों से ऐसा लग रहा था मानो बिट्स नाम के पौधे पर जैसे सारे विरले फूल महक रहे हों|

Monday, January 23, 2012


कल्पेश भट्ट के बिट्सियन दौरे की एक झलक
प्री अपोजी एक्स्ट्रावैगेंज़ा के चलते शनिवार 21 जनवरी को डिपार्टमेंट ऑफ़ पेप ने “कल्पेश भट्ट” का लेक्चर आयोजित किया |  लेक्चर में संवाद का विषय था -"How Ordinary People created Extraordinary Masterpiece”| कल्पेश वर्तमान में हार्वर्ड युनिवर्सिटी में साऊथ एशियन एथिक्स एंड वेल्यूस पर रिसर्च कर रहे हैं|
लेक्चर की शुरुआत उन्होंने अपने कैरियर के बारे में वार्ता से की | गौरतलब है कि कल्पेश ने बिट्स पिलानी से कंप्यूटर साइंस में बैचलर तथा भौतिकी में मास्टर्स की पढ़ाई की है | 25 साल की उम्र में बॉस्टन(U.S.A)  में जब वे अपने कैरियर के चरम पर थे तब जन-परोपकार की भावना उन्हें भारत वापस ले आई और वे BAPS स्वामीनारायण नामक संस्थान से जुड़ गए | उन्होंने अपने भारत आगमन के बाद के दो उन कार्यो की चर्चा की जिन्होंने कल्पेश को एक अलग पहचान दिलाई - सर्वप्रथम अक्षरधाम मंदिर और इसके पश्चात आइमैक्स फिल्म मिस्टिक इंडिया |  उन्होंने अक्षरधाम के निर्माण को विस्तार से समझाया और आने वाली कठिनाइयों का भी उल्लेख किया | विदेशी संस्थानों ने तो अक्षरधाम के कार्य समाप्ति का समय 40-45 साल बताया था परन्तु स्वामीनारायण के मार्गदर्शन पर चलते हुए कल्पेश व BAPA के कई हज़ार कार्यकर्ताओं की दिन रात मेहनत से अक्षरधाम का कार्य मात्र 5 वर्ष में पूरा हो गया | निर्देशन की शून्य जानकारी रखने वाले कल्पेश को जब एक आइमैक्स फिल्म बनाने का मौका मिला तब उन्होंने हॉलीवुड से मदद मांगना ही उचित समझा | हॉलीवुड के लोगों ने जब कल्पेश को 20 हफ्ते पूरे भारतवर्ष में शूटिंग का प्रस्ताव सुनाया तब समय व् पैसे की कमी के चलते उन्होंने यह कार्य स्वयं करने का निर्णय लिया | उन्होंने यह फिल्म उचित तकनीकी स्टाफ की मदद से मात्र 13 हफ्तों में बनाई और इस फिल्म को शीर्षक  
“मिस्टिक इंडिया” के साथ आइमैक्स फिल्म महोत्सव में प्रस्तुत किया गया | इस फिल्म को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ |  उन्होंने छात्रों को अपने भुज व सुनामी के दौरान किये  गए आपदा राहत कार्यों और अनुभव के बारे में भी अवगत कराया |
उन्होंने हाल ही में विश्व प्रख्यात डिजाइनर Yves Pepin, ECA2 के साथ मिलकर भारत  के सबसे खूबसूरत वाटर शो : 'सत-चित-आनंद' का निर्माण किया है | 45 मिनट के इस दर्शनीय प्रदर्शन में  बेहतरीन तकनीक के द्वारा पानी, आग, विडियो एवं ध्वनी का इस्तेमाल करते हुए मृत्यु के समकक्ष  एक बालक द्वारा दिखाए साहस और बुद्धिमानी पर आधारित एक पौराणिक घटना को  दर्शाया गया है |   अंत में उन्होंने छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए | एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने धर्म और आध्यात्मिकता के बीच का अंतर बहुत ख़ूबसूरती से समझाया | जाते जाते वे सभी श्रोतओं को ये सन्देश दे गए कि "आदमी स्वयं का शिल्पकार है" | हमें उम्मीद है कि हम ये सन्देश याद रख सकेंगे और इस यादगार अनुभव को कभी न भूल पायेंगे|