सुरेन्द्र शर्मा - एक ऐसे शख्स जिनको जो लोग जानते हैं, वो खुशनसीब हैं और जो नहीं जानते हैं, वो अवश्य ही खुशनसीब बनना चाहेंगे | पहले आपको बता दें की सुरेन्द्र शर्मा एक महा हास्य कवि हैं जो की हरियाणा के रहने वाले हैं | वो भारत के साथ-साथ विदेशों में भी हिन्दी समझने वालों को हँसते-हँसते लोट-पोट करा चुके हैं |
अब उनकी बात ही कुछ अलग है | पहली बात यह कि वो अपनी हास्य कविताएँ बोलने के बाद भी हँसते नहीं हैं और उनका चेहरा बिल्कुल सीधा का सीधा वैसा ही रहता है जैसे कुछ अलग हुआ ही ना हो | अब यह तो उनका गुण है जो लोग उनके इस अलग अंदाज़ पर ही हंस पड़ते हैं | दूसरी बात यह कि वो अपने हरयाणवी लहजे में जब अपनी कविताओं का पठन करते हैं तो एक अलग ही अपनापण का एहसास दिला जाते हैं और चेहरे पर अनायास ही हँसी आ जाती है |
आपको बता दें की उनकी "चार-लाइना" इतनी प्रसिद्द है कि कविताओं के बीच में वो ये कहते रहते हैं - "कविता से पहले चार लाइन सुना रियो हूँ " और काफ़ी श्रोता तो इस अजब सी आवाज़-अंदाज़ पर फ़िदा हो जाते हैं |
सुरेन्द्र जी अपनी क्षणिक मजाक के लिए भी जाने जाते हैं | वो प्रस्तुत करते वक्त भी काफ़ी हाजिर-जवाबी हैं |
हास्य कविताओं के अलावा उन्होंने "मानसरोवर के कौवे" पुस्तक भी लिखी है जो कि एक व्यंग्य-हास्य विषय पर ही है |
कुछ रोचक बातें श्री शर्मा जी के बारे में :
1.) फिलहाल वो थोडी गंभीर लेखनी करने लगे हैं | उनका मानना है कि हमें पुराने अस्तित्व पर ही गर्व नहीं करना चाहिए पर उसको मज़बूत रखने के लिए भी कर्त्तव्यरत रहना चाहिए |
2.) ऍफ़.एम. रेडियो पर उनका एक कार्यक्रम - "शर्मा जी से पूछो" काफ़ी लोकप्रिय है |
3.) उनको "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया है |
4.) शर्मा जी हरियाणा साहित्य अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर हैं और दिल्ली अकादमी से भी जुड़े हैं |
5.) कुछ पंक्तियाँ जो उनके काफ़ी करीब हैं :
आज एक बार कहे, आखिरी बार कहे,
क्या पता तुम ना रहो, क्या पता हम ना रहें |
मन्दिर-मस्जिद की या किसी ईमारत की,
माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की ||
6.) शर्मा जी अब रात के कार्यक्रमों में कम ही जाते हैं [वैसे इस बार ऑडी में कार्यक्रम शाम 7 बजे से है]
हम श्री सुरेन्द्र शर्मा का तहे दिल से इस ओएसिस पर स्वागत करते हैं और आशा करते हैं की हम सब भी लोट-पोट हो कर इस तनाव और भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में कुछ क्षण "जी" लें |
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Monday, October 20, 2008
यूफोरिया - एक यूफोरिक सोच

यूफोरिया - दिमाग में एक ऐसी स्थिति जब इंसान की रचनात्मकता अपने सर्वोच्च रूप में उभर कर आती है और इस परिभाषा को बिल्कुल सही साबित करते हुए यूफोरिया आज लोगों के दिल-ओ-जां में बस चुका है | यही वह पहला बैंड है जिसने HINDROCK जैसे परिकल्पना को सार्थक कर दिखाया था | इन्होनें इलैक्ट्रिक गिटार, तबला, ढोलक, और सितार का इतना सुगम संगम किया कि लोग बस सम्मोहित ही हो गए |
उन्होंने अरेना, स्टेडियम, कॉलेजों, स्कूलों, इंडिया गेट, कनौट प्लेस से लेकर नेपाल, श्रीलंका, दुबई, कनाडा, मॉरिशस, अमेरिका और यूनाइटेड नेशन के जनरल असेम्बली हॉल में अपनी ज़बरदस्त प्रस्तुति दी है |
बैंड अपनी उत्पत्ति के बाद काफ़ी बदल गया है लेकिन 1998 के बाद काफ़ी संतुलित है | यूफोरिया लोगों के बीच "धूमर्स" के नाम से जाने जाते हैं क्योंकि उनकी तीन एल्बम का नाम भी "धूम", "फ़िर धूम" और "री-धूम" है | इसके अलावा "महफूज़" और "गली" इनके दो और एल्बम रहे हैं |
फिलहाल इस बैंड में :
* पलाश
* हितेश
* देबोजीत भादुरी
* बेंजामिन पिंटो
मौजूद हैं | इसके अलावा अब बैंड में पूर्तिकार [बैक-अप] के रूप में अब लड़कियों को भी शामिल किया गया है |
आशा करते हैं की इस ओएसिस "यूफोरिया" एक "यूफोरिक" अनुभव के साथ हम सब को तर-बतर करके जाएगा |
कौन सा क्लब/डिपार्टमेन्ट कहाँ ?
| क्लब/डिपार्टमेन्ट | कमरा संख्या |
| आर्बिट्स [Arbits] | 2203 |
| आर्ट एन डी [Art n Dee] | 3234 |
| ऑडी फॉर्स [Audi Force] | 3201 |
| सी.सी.टी.वी [C.C.T.V] | 2215 |
| क्रिएटिव ऐक्टीविटीस क्लब [CrAC] | 3115 |
| डांस क्लब [Dance Club] | 1209, 1207 |
| म्यूजिक क्लब [Music Club] | 2158 |
| डोपी [DOPY] | 2206 |
| डॉट [DOT] | 2212, 2214 |
| इंग्लिश ड्रामा क्लब [EDC] | 3215 |
| फैश-पी [FASH-P] | 1208 |
| हिन्दी कार्यकारिणी समिति [HAS] | 2235 |
| हिन्दी ड्रामा क्लब [HDC] | 3245 |
| झंकार [Jhankar] | 2216 |
| माईम क्लब [Mime Club] | 1232 |
| एन.एस.एस. [N.S.S.] | 1223 |
| ओएसिस इंग्लिश प्रेस [OEP] | 2222 |
| ओएसिस हिन्दी प्रेस [OHP] | 2207 |
| पी.सी.आर [PcR] | 2234 |
| फोटोग्राफी क्लब [Photography Club] | 2204 |
| पोएट्री क्लब [Poetry Club] | 2221 |
| सिम्पोसिआर्क [Symposiarch] | 1234 |
Sunday, October 19, 2008
के.के. - कुछ जानकारी आपके लिए...

जन्मदिन : 23 अगस्त
जन्मस्थान : त्रिचुर, केरला
कृष्ण कुमार कुन्नाथ जिन्हें लोग ज़्यादा बेहतर KK के नाम से जानते हैं को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है | तड़प-तड़प, अजब सी, खुदा जाने, यारों दोस्ती जैसे सुंदर गीतों को अपनी मधुरिम आवाज़ से सजाने वाले और कोई नहीं पर यही शख्स हैं |
KK दिल्ली में पले-बढे हैं और यहाँ Mt सेंट मेरी में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की | उन्होंने किरोडीमल कॉलेज से स्नाताकता [graduation] की और फ़िर कुछ 8 महीनों के लिए जॉब भी किया लेकिन कहते हैं ना, किस्मत में जो लिखा हो तो पूरी कायनात आपको वहीँ खींच कर ले जाती है | ऐसा ही कुछ KK के साथ भी हुआ | उन्हें स्नातक करने के बाद ही एहसास हुआ की संगीत ही उनकी दुनिया है और इस समय तक उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक बैंड भी बना ली थी जिसमें वो एक ड्रमर थे | KK किशोर कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उनके आदर्श भी | बैंड बनाने के बाद वो हिन्दी छोड़कर अंग्रेज़ी गाने गाने लगे थे | Floyd, Extreme, Sting, Billy Joel, Guns 'N' Roses, Deep Purple and Jethro Tull उनके कुछ सबसे पहले चहेते बैंड्स में से थे | इसके बाद वो कॉलेज के तीन अलग बैंड्स में भी मुख्य गायक थे |
उन्होंने “Everything I Do, I Do It For You ...”to Mr Big’s “Just Take My Heart” जैसे गानों को भी निभाया जिससे उनकी बहुमुखी प्रतिभा का ज्ञान होता है |
इसके बाद KK ने कुछ विज्ञापनों के लिए भी गाया और बाद में माया की नगरी मुंबई में अपने पैर जमाने की कोशिश की | यहाँ पर आ कर भी उन्होंने कई विज्ञापनों को अपनी आवाज़ दी और जल्द ही विज्ञापन जगत के लोगों को इनकी कला में एक जोश वाली बात नज़र आई |
1994 में लेसली लुईस ने इन्हें UTV के किसी विज्ञापन के लिए जिंगल पेश की जो इनकी संगीत जीविका में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ ले कर आई | KK ने 4 सालों में कुछ 3500 जिंगल्स गाये और वो भी 11 अलग अलग भाषाओं में !!!
कला के धनी, KK अब पीछे मुड़कर देख ही नहीं सकते थे क्योंकि अब उनके पास इसके लिए समय ही नहीं था | अब उन्हें ए.आर.रहमान, इस्माईल दरबार जैसे चोटी के संगीतकारों से भी गीतों के पेशकश आने लगे और KK ने भी उनके विश्वास को नहीं तोडा और एक के बाद के हिट गानों की बौछार लगा दी | और बाकी सब तो अब इतिहास के पन्नों में ही दर्ज रहेगा |
कुछ रोचक जानकारियाँ KK के बारे में आप सभी के लिए :
1.) अभी तक KK ने 8 अलग अलग भाषाओं में गाने गाए हैं |
2.) कुछ यादगार जिंगल्स - मोंटे कार्लो, सनी बजाज, टी.वी.एस स्कूटी, एशियन पेंट्स, कोका कोला, जम्पिन’, यो फ्रूटी, कोलगेट जेल, क्लोस़प, सिंथोल, अमूल चीज़, पेप्सी ‘ये दिल मांगे मोर’ |
3.) जस्ट मोहब्बत और हिप हिप हुर्रे जैसे टी.वी. सीरियल के शीर्षक गीत भी KK ने गाए हैं |
4.) उनकी पहली एल्बम - "पल" एक ज़बरदस्त हिट रही थी |
5.) KK के बैंड में कारी पीटर्स (बास), कल्याण बरुआ(लीड गिटार और हारमोनियम), कर्ट पीटर्स(ड्रमर)
और रिंकू राजपूत (कीबोर्ड) हैं |
6.) उनका पहला बॉलीवुड गीत : "छोड़ आए हम" (माचिस) था पर उनका
पहला हिट गाना तड़प तड़प (हम दिल दे चुके सनम) रही |
7.) बचपन में KK डॉक्टर बनना चाहते थे |
8.) उनकी दूसरी अल्बम "हमसफ़र" है जिसमें उन्होंने एक गाना अपनी पत्नी ज्योति को समर्पित किया है |
9.) KK ने कई कॉलेजों में भी प्रस्तुति दी है जैसे - आई.आई.टी कानपूर - नवम्बर 2005, एन.आई.टी तिरुचिरापल्ली - सेप्टेम्बर 2007, एन.आई.टी सुरतकल - फरवरी 2008, जे.आई.आई.टी.यु नॉएडा - मार्च 2008, नेताजी सुभाष इंजीनियरिंग कॉलेज कोलकाता - अप्रैल 2008 |
तो आप सभी के लिए पेश है KK उर्फ़ कृष्ण कुमार कुन्नाथ इस बार बिट्स-पिलानी में ओएसिस-2008 उनियो मिस्टिका में |
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