Tuesday, February 21, 2012

MUNwalk

शनिवार 18 फरवरी को तीनदिवसीय “बिट्समुन 2012” का उद्घाटन अनेक गणमान्य लोगों के सानिध्य में संपन्न हुआ| कार्यक्रम के मुख्यातिथि अमरीकी दूतावास के प्रवक्ता एवं सूचनाधिकारी – “पीटर व्रूमिन”, सम्मानित अतिथि जी. रघुरामा – निदेशक बिट्स पिलानी, पिलानी कैम्पस का बिट्समुन अध्यक्ष, स्वप्निल हरिया द्वारा अभिनन्दन किया गया| कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्यातिथि ने कुछ समसामयिक अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक धारणाओं के बारे में चर्चा करी| मुख्यातिथि के भाषण के बाद बिट्समुन उपाध्यक्ष, अविनाश उपाध्याय ने समस्त अतिथिगण को धन्यवाद कहा और तीनदिवसीय सेमिनार के लिये प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दी| बिट्समुन’ 12 के सेक्रेटरी जनरल, रूबेन जोर्ज ने बताया कि इस बार बिट्समुन में 5 काउंसिल होंगी – GA, ECOSOC, UNDG, HRC, IMPACT 

पहले दिन एक्सेंचर इंडिया के लीड “राघव नार्सले” का व्याख्यान हुआ | राघव ने इंडियन अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के ऊपर विस्तार से बताया| गौरतलब है कि राघव भारत सरकार, UNDP इत्यादि के अनुसन्धान कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं| 

इवेंट के दूसरे दिन “क्लोथिंग मेन” के नाम से प्रसिद्ध “गूँज” एन. जी. ओ. के संस्थापक अंशु गुप्ता ने सामाजिक उद्यम के बारे में चर्चा करी और गूँज के कार्यों के बारें में विस्तारपूर्वक बताकर श्रोताओं को सामाजिक कल्याण के लिये प्रोत्सहित किया| गूँज की आवाज़ अंशु, अशोका के वैश्विक राजदूत हैं और फोर्ब्स द्वारा उन्हें भारत का सबसे शक्तिशाली उद्यमी का ख़िताब मिल चुका है|

बिट्समुन में इस प्रकार कई आर्थिक, सामाजिक, प्रबंधन और कूटनीतिक मुद्दों पर अहम वाद-विवाद हुआ और विगत तीन वर्षों की तरह यह चौथा संस्करण भी काफी सफल रहा|

Monday, February 13, 2012

ई.सरथ बाबु से मुलाकात


इंटरफेस-2012 में अभी तक चल रहा रोमांच अपने चरम पर पहुँच गया जब देश के प्रसिद्द कैटरिंग सर्विसेस 'फ़ूड किंग' के सी..ओ. श्रीमान .सरथ बाबु ने कैम्पस में कदम रखा| वे यहाँ उद्योगवृति पर भाषण देने आये थे|
बिट्स के ही पूर्व छात्र सरथ बाबु को वर्ष 2008 में यूथ आइकन से नवाज़ा गया था| ये राजनीति में भी अपने हाथ आज़मा चुके हैं कैम्पस में ऐसे प्रसिद्ध और प्रभावी व्यक्ति को पाकर हिंदी प्रेस क्लब उनसे रूबरू हुआ और उनहोंने भी ख़ुशी से हमारे सवालों के ज़वाब दिए| आइये उनसे हुए साक्षात्कार पर एक नज़र डालें -

एच.पी.सी-  बिट्स आकर आपको कैसा लग रहा है?
सरथ मैं बहुत खुश हूँ| खासतौर पर बिट्स में हो रहे इस परिवर्तन को देखकर काफ़ी खुश हूँ|
एच.पी.सी-   2008 में जब आपको यूथ आइकन से सम्मानित किया गया, तब आपको कैसा लग रहा था?
सरथ मैं बहुत ही खुश था| इस अवॉर्ड के साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी भी गयी थी| अभी तो कई बड़े काम      करने हैं, देश के लिए, भारत के विकास और लाभ के लिए|
एच.पी.सीआपके द्वारा शुरू किये गये अभियानहंगर फ्री इंडिया’ पर थोड़ा प्रकाश डालिए?
सरथ मैंने अपनी जिंदगी में बहुत भूख देखी है| इस अभियान के अंतर्गत हम गरीब लोगों को अनाज मुहैय्या कराएँगे| लोगों को हमारे इस अभियान हंगर फ्री इंडिया के बारे में जागरूक कराना है| हमने मुफ्त किताबें वितरित करायीं हैं10 अक्टूबर यानि 10/10 को हमने 'हंगर फ्री डे' भी घोषित किया है|
एच.पी.सीआपको फ़ूड-किंग कैटरिंग खोलने का विचार कैसे आया?
सरथ भारत में एक स्थानीय ब्रांड की ज़रूरत लग रही थी| अच्छा खाना कम दाम में मुहैय्या करने के विचार से मैंने इस क्षेत्र में कदम रखा| अभी हम देश में फ़ूड किंग की 100 और शाखाएं खोलने का विचार कर रहे हैं|
एच.पी.सीआप एक समाज-सेवी भी हैं, एक राजनीतिज्ञ भी हैं और एक उद्योगपति भी हैं, ये सब आप कैसे संभालते हैं?
सरथ -  (हँसते हुए...)बिट्सियन ऐटीट्युड सब संभालना सिखा देता है| आप भी तो बिट्सियन हैं...समझ जाएँगे|
एच.पी.सीआप बिट्सियन जनता के लिए कुछ सन्देश देना चाहेंगे?
सरथयहाँ के बच्चों में बहुत क्षमता है| इन्हें और जिम्मेदारी लेनी चाहिए| देश के भविष्य को संवारने हेतु इनसे बहुत उम्मीदें हैं अतः इन्हें भी अपने हित के साथ-साथ देश-हित के प्रति कर्तव्यशील रहना चाहिए|

समीर हंचाटे से रूबरू हुआ हिंदी प्रेस क्लब


इंटरफेस के दौरान हो रहे अनेक रोचक आयोजनों में शामिल थी फिल्म-मेकिंग वर्कशॉप जिसमें समीर हंचाटे, स्टॉक मार्केट पर आधारित फिल्म “गफ़ला” के निर्देशक, बिट्सियन जनता से रूबरू हुए| समीर ने 1998 में ‘समीर हंचाटे फिल्म-मेकर’ नाम से एक फिल्म प्रोडक्शन कम्पनी खोली थी जिसके अंतर्गत वे US में भी दो लघु-फिल्मों “एंजेल” व् “ब्लैंक” का निर्माण कर चुके हैं| कैम्पस पर ऐसे शख्स को पाकर हिंदी प्रेस क्लब उनसे रूबरू हुआ और उन्होंने भी पूरे शौक हमारे हर सवालों का जवाब दिया| एक नज़र इस साक्षात्कार के प्रमुख अंगों पर :-

  
एच.पी.सी.- बिट्स में आकर कैसा लगा?
समीर- बेहद सुखद अनुभव रहा| पहली बार इतने इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के साथ फिल्म निर्माण सम्बन्धी वर्कशॉप पर काम किया और यहाँ के लोगों की मेहमान नवाज़ी  ने मुझे बहुत प्रभावित किया |

एच.पी.सी.- फिल्म निर्माण के क्षेत्र में किसी गंभीर व्यक्ति के लिए क्या दो घंटे की  वर्कशॉप पर्याप्त है?
समीर - मेरे हिसाब से ऐसी किसी भी  वर्कशॉप का उद्देश्य इच्छुक व्यक्ति को सही दिशा, उस क्षेत्र विशेष में आने वाली समस्याएँ व उस कार्य की उपयोगिता समझाना होता है| यहाँ के लोगों की व्यस्त दिनचर्या देखते हुए दो घंटे में अपनी बात रखने में कुछ दिक्कत तो जरूर हुई पर वर्कशॉप के लिए आने वाले लोगों की रुचि देखकर मैं जो करने आया था शायद वो कर पाया |

एच.पी.सी.- आज 'फिल्में' साहित्य का एक प्रमुख अंग हैं और साहित्य का सृजन समाज को सार्थक दिशा देने के लिए होना चाहिए| क्या आज-कल की फिल्में इस कथन का पालन कर रही हैं?
समीर - देखिए, नैतिक दृष्टि से आज का समय निश्चित ही फिल्म इंडस्ट्री के लिए हार है| कई नामचीन निर्देशक और अभिनेता फिल्म निर्माण के उद्देश्य को भूल सा गए हैं| लोग भी अपनी आपाथापी भरी जिंदगी में दिमाग को सुलाकर देखी जा सकने वाली मनोरंजक फिल्में देखना पसंद करते हैं| 50 -60 का दशक हिंदी फिल्म-जगत का 'स्वर्ण- युग' रहा पर उस ज़माने जैसी फिल्में भी बनाने में हम नाकाम हो रहे हैं,पर कुछ नए विचारशील व्यक्ति इस दौर को संजीवनी प्रदान कर रहे हैं|

एच.पी.सी. - क्या "गफ़ला" के बाद अब आप किसी नए 'प्रयोग' के लिए तैयार हैं?
समीर - 'गफ़ला' स्टॉक-एक्सचेंज पर आधारित फिल्म थी जो बॉक्स-ऑफिस पर नाकाम रही | फिल्म के प्रमोशन और मार्केटिंग में कमी के साथ-साथ बड़े नामों का न होना फिल्म की असफलता के प्रमुख कारण रहे | अभी मैं "मौर्या-मौर्या" नाम की महाराष्ट्र में घटित क्राइम पर आधारित फिल्म बना रहा हूँ |

एच.पी.सी. - कोई ऐसा तरीका आप के पास है जो छोटे बजट की अच्छी फिल्मों को भी सफल बना सके
समीर - मैं भी ऐसे ही किसी तरीके की तलाश में हूँ, पर फिर भी मुझे लगता है कि फिल्मों की
मार्केटिंग के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाना चाहिए
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एच.पी.सी. - बिट्सियन जनता के लिए आपका क्या सन्देश है?
समीर - आप अभी से एम.बी.ए. के बिना ही मैनेज करना सीख रहे हैं जो जीवन के किसी भी क्षेत्र के लिए अति महत्वपूर्ण है | अपनी दिनचर्या को व्यस्त रखिए और अपने कार्य में बेहतर करने का निरंतर प्रयास करते रहिए

Sunday, February 12, 2012

बार्टर किंग


इंटरफेस 2012 में शनिवार दोपहर को बार्टर किंग इवेंट का आयोजन किया गया| इवेंट की संयोजक नेहा विज के अनुसार इवेंट मुख्यतः समझौता करने के कौशल और विपणन सम्बन्धी ज्ञान के परीक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया| प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर से टीमों ने भाग लिया| प्रतियोगिता 2 चरणों में आयोजित हुई| प्रथम चरण ‘बैग-बोरो-स्टील’ राउंड था जो 2 घंटे के अवधि का था| इसमें 16 टीमों ने प्रतिभाग किया| इसमें से 4 टीमों को अगले चरण के लिए चुना गया| दूसरे चरण में टीमों को आयोजकों के तरफ से दिए गए सामान संग्रहों में से परस्पर आदन-प्रदान द्वारा एक अर्थपूर्ण वस्तु या वस्तुसंग्रह तैयार करना था| दूसरे चरण 45 मिनट का था और मूल्यांकन अंकों के आधार पर था| अंत में NMIMS मुंबई और IPE हैदराबाद सयुंक्त रूप से विजेता घोषित किये गए | विजेताओं को 3000रू. नकद और मोबाइल दिया गया|