Monday, March 23, 2009

आध्यात्मिकता अपोजी के द्वार - माइकल क्रेमो

माइकल ऐ. क्रेमो
माइकल ऐ. क्रेमो जिन्हें द्रुत्कर्मा दसा के नाम से भी जाना जाता है एक अमरीकन हिन्दू सृष्टि-सिद्धांतवादी (क्रीएशनिस्ट) हैं जिनका काम यह दर्शाता है कि आधुनिक मानव धरती पर निमित वर्षों से रह रहा है | उनकी किताब "फॉर्बिडेन आर्किओलोजी" ने बहुत से हिन्दू "सृष्टि-सिद्धांतवादी" और "पैरानॉर्मलिस्ट" को प्रभावित किया है लेकिन विज्ञान जगत ने इसमें दिए गए सूत्रों को नकारा है |

क्रेमो ने जॉर्ज वाशिंगटन युनिवेर्सिटी से पढ़ाई की और अमरीकी नौसेना में काम किया | क्रेमो कृष्ण जागरूकता के लिए "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय" और "भक्तिवेदंता इंस्टिट्यूट" के सदस्य हैं | जब उन्हें 'सुशोभित मृत' नामक एक कंसर्ट में भगवद गीता की एक पुस्तक दी गयी , उसके बाद उन्होंने समकालीन लेखकों को कहा कि वे अपना जीवन कृष्ण को अर्पित करना चाहते हैं | उन्होंने इसकॉन द्वारा मृत्युदंड पर दिए गए बयान पर पेपर भी लिखा और इसकॉन द्वारा आयोजित ' डिसिप्लिक ' उत्तराधिकार ( जिसे "रित्विकिज़म" कहते हैं ) पर संघठित अभियान का नेतृत्व किया है |

मार्च २००९, यानी इसी महीने "हिस्ट्री" चैनेल पर एक टी.वी सीरिज़ "ऐन्शिएन्ट एलिएंस" पर आ रहे हैं | वे स्वयं को एक वैदिक पुरातत्ववेत्ता मानते हैं |

तो इंतज़ार किस बात का है , अगर आपको आध्यात्मिक या मानव विकास में रूचि है तो इस व्याख्यान में अवश्य उपस्थित रहें | ऐसे मौके बार- बार नहीं आते |

-विभु

एस.पी.कोठारी इस अपोजी

एस.पी.कोठारी
एस.पी.कोठारी, यह नाम सुना-सुना सा लगता है| अरे ! ये तो एक बिट्सियन ही हैं जो अपोजी-०९ में आ रहे हैं | बिट्स से इंजीनियरिंग करने, आईआईएम से एम.बी.ए. और युनिवर्सिटी ऑफ़ इयोवा से पी.एच.डी. की | शायद हममें से बहुत विद्यार्थी ऐसे ही कुछ 'रिज्यूमे' की कामना करते हैं|

कोठारी जी, जो अभी ईक्युइटी रिसर्च के 'ग्लोबल हेड' हैं, जुलाई २००८ से पहले एम.आई.टी. इलिन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में 'गोर्डन वाई बिलिआर्ड' प्रोफ़ेसर ऑफ़ मैनेजमेंट थे | साथ ही वे वहां अर्थशाश्त्र, वित्त और 'अकाउंटिंग' के 'हेड' थे | वे जर्नल ऑफ़ 'इकोनोमिक्स और अकाउंटिंग' के संपादक भी हैं |

उनका व्याख्यान हम में से सभी के लिए काफी लाभदायक होगा और हमारा अनुमान है की जनता इस व्याख्यान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगी |

तो आइये मिलते हैं कोठारी जी से... और कहीं नहीं... अपोजी-०९ में !!!

-विभु

Sunday, March 22, 2009

जिमी वेल्स कौन ?

सबसे पहले आपको मिलवाते हैं इनसे जो इस अपोजी हमारे समक्ष एक व्याख्यान देंगे...
आइये जानते हैं कुछ उनके बारे में...


जिमी वेल्स- विकिपीडिया के संस्थापक
शायद ही हममें से कोई ऐसा है जो " विकिपीडिया " का इस्तेमाल नहीं करता | पर हम से गिने-चुने लोगों को ही पता होगा की इस अनोखी " एनसाइक्लोपिडिया " को बनाने वाली महान हस्ती कौन है? हमे यह बताते हुए बड़ी ख़ुशी हो रही है की वह और कोई बल्कि " जिमी दोनल जिम्बो वेल्स " हैं जो कि इस अपोजी में हमारे सामने एक व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे |

" जिम्बो ", जैसा कि उन्हें जाना जाता है, एक अमरीकन इंटरनेट उद्योगपति हैं और इस समय विकिपीडिया संस्थान के "बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ " में "कम्युनिटी फाउंडर" की कुर्सी संभाल रहे हैं |

2001 में जब विकिपीडिया अस्तित्व में आई, तभी से इन्हें उसके संयुक्त निर्माणकर्ताओं में से जाना जाना जाता है | यहाँ पर शब्द "संयुक्त " बड़ा मायने रखता है और विवाद का मुद्दा बना हुआ है | "लार्री स्लान्गेर" जिन्होंने इनके साथ "नुपिडिया" एक और "ओपन कंटेंट " एनसाइक्लोपिडिया पर प्रमुख सम्पादक कि हैसियत से काम किया, उन्हें भी विकिपीडिया के निर्माणकर्ताओं में माना गया है जबकि जिम्बो का कहना है वे अकेले ही इसके निर्माणकर्ता हैं |
2006 में "टाइम" पत्रिका ने इनका नाम विश्व के सबसे प्रभावशाली लोगों सूची में स्थान दिया है |

जिमी वेल्स का जन्म हंट्सविले, अलबामा, अमरीका में हुआ | उनके पिता जिमी, एक " किराने के सामान " की दूकान पर काम करते थे और माँ, डोरिस, दादी के साथ एक छोटा से "एक कमरे" में स्कूल चलाती थी | वेल्स ने आठवीं तक अपनी पढ़ाई वहीँ की और उन्हें ग़रीबी का भी सामना करना पडा | पर उनके घर में शिक्षा एक आवेश था |
उन्होंने अपनी स्नातक डिग्री वित्त में औबर्न यूनिवर्सिटी से की, साथ ही मास्टर्स यूनिवर्सिटी ऑफ़ अलबामा और पी.एच.डी. इन्डियाना यूनिवर्सिटी से की | 2007 में उन्हें विश्व "इकनॉमिक" फोरम द्वारा युवा विश्वव्यापी नेताओं में से एक चुना गया |
निश्चय से ही एक ऐसी हस्ती का हमारे साथ होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है और हमें इस मौके का फायदा अवश्य उठाना चाहिए |
तो आइये मिलिए इस अपोजी जिमी वेल्स से !!!

-विभु

अपोजी - ०९

तो अपोजी की शुरुआत बस होने ही वाली है कल...
माफ़ कीजियेगा, इस बार काफ़ी दिनों बाद यह ब्लॉग अद्यतन हो रहा है |
खैर देर आए दुरुस्त आए...
आज से शुरू है जानकारियों का सिलसिला... बस आप हमारे साथ बने रहिये...
जय अपोजी, जय बिट्स !!