Monday, October 20, 2008

"चार लाइन सुना रियो हूँ " - पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा

सुरेन्द्र शर्मा - एक ऐसे शख्स जिनको जो लोग जानते हैं, वो खुशनसीब हैं और जो नहीं जानते हैं, वो अवश्य ही खुशनसीब बनना चाहेंगे | पहले आपको बता दें की सुरेन्द्र शर्मा एक महा हास्य कवि हैं जो की हरियाणा के रहने वाले हैं | वो भारत के साथ-साथ विदेशों में भी हिन्दी समझने वालों को हँसते-हँसते लोट-पोट करा चुके हैं |
अब उनकी बात ही कुछ अलग है | पहली बात यह कि वो अपनी हास्य कविताएँ बोलने के बाद भी हँसते नहीं हैं और उनका चेहरा बिल्कुल सीधा का सीधा वैसा ही रहता है जैसे कुछ अलग हुआ ही ना हो | अब यह तो उनका गुण है जो लोग उनके इस अलग अंदाज़ पर ही हंस पड़ते हैं | दूसरी बात यह कि वो अपने हरयाणवी लहजे में जब अपनी कविताओं का पठन करते हैं तो एक अलग ही अपनापण का एहसास दिला जाते हैं और चेहरे पर अनायास ही हँसी आ जाती है |
आपको बता दें की उनकी "चार-लाइना" इतनी प्रसिद्द है कि कविताओं के बीच में वो ये कहते रहते हैं - "कविता से पहले चार लाइन सुना रियो हूँ " और काफ़ी श्रोता तो इस अजब सी आवाज़-अंदाज़ पर फ़िदा हो जाते हैं |
सुरेन्द्र जी अपनी क्षणिक मजाक के लिए भी जाने जाते हैं | वो प्रस्तुत करते वक्त भी काफ़ी हाजिर-जवाबी हैं |
हास्य कविताओं के अलावा उन्होंने "मानसरोवर के कौवे" पुस्तक भी लिखी है जो कि एक व्यंग्य-हास्य विषय पर ही है |

कुछ रोचक बातें श्री शर्मा जी के बारे में :
1.) फिलहाल वो थोडी गंभीर लेखनी करने लगे हैं | उनका मानना है कि हमें पुराने अस्तित्व पर ही गर्व नहीं करना चाहिए पर उसको मज़बूत रखने के लिए भी कर्त्तव्यरत रहना चाहिए |
2.) ऍफ़.एम. रेडियो पर उनका एक कार्यक्रम - "शर्मा जी से पूछो" काफ़ी लोकप्रिय है |
3.) उनको "पद्मश्री" से सम्मानित किया गया है |
4.) शर्मा जी हरियाणा साहित्य अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर हैं और दिल्ली अकादमी से भी जुड़े हैं |
5.) कुछ पंक्तियाँ जो उनके काफ़ी करीब हैं :
आज एक बार कहे, आखिरी बार कहे,
क्या पता तुम ना रहो, क्या पता हम ना रहें |
मन्दिर-मस्जिद की या किसी ईमारत की,
माटी तो लगी इसमें मेरे भारत की ||
6.) शर्मा जी अब रात के कार्यक्रमों में कम ही जाते हैं [वैसे इस बार ऑडी में कार्यक्रम शाम 7 बजे से है]

हम श्री सुरेन्द्र शर्मा का तहे दिल से इस ओएसिस पर स्वागत करते हैं और आशा करते हैं की हम सब भी लोट-पोट हो कर इस तनाव और भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में कुछ क्षण "जी" लें |

3 comments:

  1. सही बात | सब नज़रों का धोखा है |

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  2. sari ume gujar di 4 se 5 line tak nahi aa sake, fir bhee irshad bhai irshad

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