- थीम – इन्सोम्निया
- कुल इवेंट्स – 67 + तीन प्रौफ़ शो |
- प्रौफ़ शो में – विशाल-शेखर, एहसान कुरैशी, कुमार विश्वास, मदर जेन, भयानक मौत |
- डांस वर्कशॉप के लिए बॉस्को-सीज़र डांस कंपनी |
- कुल प्रायोजन राशि – करीब 25 लाख रूपये |
- बजट – करीब 50 लाख रूपये |
- 88 कॉलेजों से करीब 1400 प्रतिभागी |
- मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा – फ़ैश पी की जज
- कैम्पस में जादूगरों का खेल
- रॉकटेव्स को प्रोफेशनल लुक देने के लिए धुएँ का प्रयोग |
- थीम के अनुरूप – रात को अधिक इवेंट्स – जैसे ट्रेज़र हंट व एस्ट्रो क्लब द्वारा “स्काई वॉचिंग सेशन”
- स्ट्रीट डांस में एक रैप क्रू – “Triple Aces” प्रदर्शन करेगा |
- स्टेज व स्ट्रीट प्लेज़ के लिए थेस्पो 12 से संगठन |
हिन्दी प्रेस क्लब, बिट्स पिलानी कैम्पस में हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए काम करता है..हमारे प्रकाशन कुछ इस प्रकार है- 1.) बॉसम हिन्दी प्रेस - "स्पर्धा" 2.) ओएसिस हिन्दी प्रेस - "प्रतिबिंब" 3.) अपोजी हिन्दी प्रेस - "सृजन" 4.) मासिक बिट्सियन समाचार पत्र - "प्रवाह" 5.) "वाणी" - बिट्स की एकमात्र हिन्दी वार्षिक पत्रिका | ज़्यादा जानकारी के लिए ब्लॉग पढ़ते रहिये।
Friday, October 22, 2010
ओएसिस २०१०
Friday, September 17, 2010
“ये मस्त श्री लंकंस हैं"
प्र. आपकी पिलानी तक की यात्रा कैसी रही ?
उ. श्री लंका से चेन्नई होते हुए दिल्ली तक के आसान सफ़र के पश्चात् ख़राब सड़को की वजह से दिल्ली से पिलानी तक का हमारा सफ़र कठिन रहा |
प्र. क्या आप भारत की किसी प्रतियोगिता में पहली बार भाग ले रहे हैं ?
उ. नहीं, इससे पहले भी एक बार हम P.E.S इंस्टिट्यूट बेंगलुरु जा चुके हैं |
प्र. क्या आपको बिट्स द्वारा बॉसम में पहली बार आमंत्रित किया गया है ?
उ. हाँ, हमें बॉसम में पहली बार आमंत्रित किया गया है |
प्र. आप कितने प्रतिभागी है और किन किन खेलों में भाग ले रहे हैं ?
उ. हम 17 पुरुष व् 4 महिला प्रतिभागी हैं जो कि बेडमिन्टन , टेबल टेनिस और तैराकी में भाग ले रहे हैं |
प्र. यहाँ की व आपके इंस्टिट्यूट की खेल कूद सुविधाओं में आपने क्या अंतर महसूस किया ?
उ. यहाँ पर खेल की संपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध है परन्तु हमें कुछ खेल जैसे टेबल टेनिस की व्यवस्था थोड़ी अव्यवस्थित लगी | हमारे इंस्टिट्यूट में भी कई खेलो के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं |
प्र. बिट्स पिलानी द्वारा दी गयी सुविधाओं के बारे में आपका क्या विचार हैं ?
उ. हम यहाँ की ठहरने की सुविधाओं से संतुष्ट है लेकिन हमारे यहाँ व यहाँ के खान-पान में बहुत अंतर होने के कारण हमें खाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है |
प्र. क्या आप यहाँ के वातावरण में सहज महसूस कर रहे है ?
उ. यहाँ के वातावरण में हम सुखद महसूस कर रहे हैं | चारों ओर हरियाली देख कर आनंद आ रहा है |
प्र. आपको बिट्स कैसा लग रहा है ?
उ. बिट्स का कैम्पस काफी बड़ा है | चूँकि अभी हमें यहाँ एक ही दिन हुआ है, हमने ज़्यादा कुछ देखा नहीं है | आने वाले 4 दिनों में हम कैम्पस व आसपास की जगहों पर घूमना चाहेंगे विशेषकर बिरला संघ्रालय |
प्र. आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ?
उ. हिंदी भाषा न आने के कारण स्थानीय लोग जैसे मेस के लोग, ऑटो वाले आदि से संवाद करने में दिक्कत हो रही है | यातायात साधनों की भी कमी महसूस हो रही है | आज हमें हमारे अभ्यास सत्र के समय पंजीकरण (रेजिस्ट्रेशन ) के लिए बुला लिया गया जिसके कारण हम अभ्यास नहीं कर पाए | हम ओर अच्छे समन्वय की आशा करते हैं |
प्र. आप कुछ और सुझाव इत्यादि देना चाहेंगे ?
उ. हम अगले बॉसम के लिए सुझाव देना चाहते हैं कि अगर प्रतिभागियों के मनोरंजन के लिए डी. जे.रात्रि का आयोजन किया जाये तो इसे और सफल व मनोरंजक बनाया जा सकता है | बाहर से आये हुए प्रतिभागियों के लिए इन्टरनेट सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए | हम बिट्स के विद्यार्थियों से मदद की उम्मीद रखते हैं | अंत में हम यही आशा करते है कि बिट्स हमें अगले वर्ष भी आमंत्रित करेगा |
बॉसम 2010 का शानदार आगाज़
इसके बाद मुख्य अतिथि अर्जुन पुरस्कार विजेता गोपाल सैनी जी ने खेलों के महत्त्व पर प्रकाश डाला | उन्होंने सचिन तेंदुलकर और पी.टी उषा का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ साथ खेल कूद एवं व्यायाम भी आवश्यक है तथा खेल जगत में प्रतिभा भी आपको सफलता के शिखर तक ले जा सकती है | साथ ही उन्होंने 70-80 के दशक से अभी तक खेलों की स्तिथि में अत्यधिक सुधार के बारे में भी सूचना दी और कहा कि अब खेलों का स्तर काफी ऊँचा हो गया है | अंत में उन्होंने सभी खिलाड़ियों को संघर्षशील बनने की प्रेरणा दी | इसी के साथ स्पोर्ट्स सेक्रेटरी ने सभी प्रतिभागियों को उनके साथ खेल शपथ लेने के लिए कहा |
जनता में हलचल तब मची जब डांस क्लब ने अपने मनमोहक करतब दिखाने आरम्भ किये | सभी ने उनके उम्दा नृत्य का लुत्फ़ उठाया | सी.सी.टी.वी द्वारा बॉसम के कुछ प्रायोजकों के विज्ञापन भी प्रसारित किये गए | जॉइंट सेक्रेटरी अनुभा जैन ने धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सभी उपस्थित अतिथि डॉ.बी.वी बाबू, डॉ. राजीव गुप्ता, चीफ वार्डेन एस.के. वर्मा तथा गोपाल सैनी का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया | परन्तु जैसा कि कहते हैं कि ‘पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त’, वही आज इस उद्घाटन समारोह में भी हुआ | अंत में हुई रंग बिरंगी आतिशबाजी से समूचा आसमान जगमगा उठा और इसने सभी का मन मोह लिया |
इसके बाद बिट्स पिलानी व सेंट मार्टिंस, मुंबई के बीच मैत्री बास्केटबाल मैच भी हुआ | इस अत्यंत रोमांचक मुकाबले का अंत बराबरी पर हुआ |
बॉसम मुख्य अतिथि – ‘ एक मुलाकात'
Sunday, September 5, 2010
मरुधरा नाईट - "रंगबरी"
अगस्त माह के प्रारम्भ से ही बिट्स कैम्पस में चारों ओर यह चर्चा आम थी कि इस सत्र की पहली असॉक नाइट कितनी प्रभावशाली और मनोरंजनकारी होगी | अंततः जब 26 अगस्त की रात को 8 बजे “मरुधरा” की सांस्कृतिक नाईट “ रंगबरी ” आरम्भ हुई तो आशा अनुरूप एक बड़ी जनसंख्या इस समारोह को देखने पहुँची |
समारोह का शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व एस.डब्ल्यू. डी. डीन - श्री बी.वी.बाबू के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया | इसके पश्चात प्रकाश व चिराग ने “बिन तेरे” गीत से इस नाईट की धमाकेदार शुरुआत की | तत्पश्चात् “आई हेट लव स्टोरीज़’’ पर किये गए नृत्य ने सम्पूर्ण सभागार को प्रफुल्लित और आह्लादित कर दिया |
आरम्भ में कलाकारों, मुख्यतः प्रथम वर्ष के कलाकारों के मन में हिचकिचाहट और भय साफ़ नज़र आ रहा था क्योंकि इतनी बड़ी बिट्सियन जनता के समक्ष गलतियों की गुंजाइश न्यून करना काफी कठिन होता है परन्तु फिर भी मंच पर कलाकारों की परिपक्वता दर्शनीय थी तथा जिस सम्पूर्णता के साथ वे अपने हुनर की प्रस्तुति कर रहे थे , वह वास्तव में सराहनीय थी |
कुछ और बेहतरीन मंचनों के बाद समय था “चाचू” माईम का | हालांकि पूरी माईम में दोहरे अर्थ वाले अनेक वाक्यांशों का प्रयोग किया गया था लेकिन इसके मंचन के दौरान और पश्चात् जनता ने अपने मनोरंजन का प्रमाण अपनी अविरल तालियों से दिया | फिर मंच पर आई “चिराग” और “निशांत” की जोड़ी ; जिन्होंने महान पार्श्व-गायक मो. रफ़ी के कई ऐतिहासिक गानों पर गायन और वादन की जो छटा पेश की, वो भुलाई नहीं जा सकती | मनोरंजन के इस कारवां को बढ़ाने का काम किया “बेव- 3डी” और “फर्स्ट लव” नामक प्रस्तुतियों ने | बीच बीच में जनता ने “इन्क़लाब ज़िंदाबाद” और “भारत माता की जय” जैसे नारे लगाकर पूरे ऑडी में देशभक्ति की एक लहर सी दौड़ा दी |
“स्टेप अप” पर किये गए शानदार हिप- हॉप नृत्य ने तो जैसे पूरे समां को एक पल के लिए थाम सा लिया | इस प्रस्तुति पर पूरी दर्शक-दीर्घा खुशी से झूम उठी | इसके बाद निशांत, अंकुर और समग्र की तिकड़ी ने जब ‘आयशा’ फ़िल्म का “शाम” नामक गीत गाया तो उसकी प्रशंसा तहेदिल से हुई और पूरी जनता ने उनके साथ “पारा – पारा” गाते हुए उनका भरपूर साथ दिया |
“दिल तो बच्चा है जी” पर स्वप्निल, रॉबिन और सुरभि द्वारा किये गए नृत्य को भी काफी सराहा गया |
Saturday, August 28, 2010
स्पिक-मैके
23 अगस्त को बिट्स का ऑडी विभिन्न रूप के शास्त्रीय संगीत के अद्भुत समागम से गूँज उठा | SPICMACAY ने नॉर्वे के बहुप्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित शास्त्रीय बैंड “स्ट्रिंग्स अनलिमिटेड” को आमंत्रित किया | स्ट्रिंग्स अनलिमिटेड की चार महिला कलाकारों ने अनेक पश्चिमी संगीतकारों की धुनों पर संगीत का अद्भुत प्रदर्शन कर सभी दर्शकगण को मंत्रमुग्ध कर दिया |
इस ग्रुप के कलाकारों “क्रिस्टीन कार्लोसन, क्रिस्टीन जेर्डेस स्कजोलास, एनी बीट्रीक्स लैंग्मोइन व क्रिस्टीन बेग्जेर्डे” ने वायलिन पर शानदार संगीत की प्रस्तुति देकर खचाखच भरे सभागार में बैठे सभी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लिया | उन्होंने जब मोज़ार्ट की धुन प्रस्तुत की तो ऑडी का हर कोना संगीत की भव्य खुशबू से महकने लगा | “सारे जहां से अच्छा - हिन्दोस्तां हमारा” गाने की धुन पर जनता ने कलाकारों को तालियों के रूप में अपना प्यार दर्शाया | नॉर्वेजियन कलाकारों का अपने शास्त्रीय संगीत की तरफ रुझान, और उनकी धुनों की पकड़ व सुर एवं लय की समझ तथा उनका अपने संगीत को प्रदर्शित करने का जज़्बा मंच पर साफ़ नज़र आ रहा था | सबसे रोचक बात यह थी की नॉर्वे के कलाकार होने के बावजूद उन्होंने भारतीय शैली की पोशाक पहनकर मंच पर अपनी आश्चर्यचकित प्रस्तुति दी |
SPICMACAY के इस समारोह मे यह झलकता है कि पश्चिमी रॉक संगीत के मध्य शास्त्रीय संगीत भी एक गुलाब की पंखुडी की तरह अपनी महक सदियों तक फैलाता रहेगा |
Monday, August 23, 2010
कॉन्क्वेस्ट 2010

इस मौके पर मुख्य अतिथि - लोकसत्ता पार्टी के संस्थापक व देश के जाने हुए राजनीतिज्ञ “डॉ. जयप्रकाश नारायण”, म्यू-सिग्मा कंपनी के सी.ई.ओ. श्री धीरज राजाराम, व बिट्स पिलानी के निदेशक डॉ. जी. रघुरामा ने दीप प्रज्ज्वलित करके उद्घाटन किया | उद्घाटन के पश्चात डॉ. जयप्रकाश नारायण ने “स्वरोजगार व उद्यमिता के विकास में सरकार की भूमिका ” के विषय पर खचाखच भरे लेक्चर हॉल को संबोधित किया और उन्होंने बताया कि आज से तीन शताब्दी पूर्व, भारत विश्व के सबसे धनी देशों में से एक था, लेकिन 1991 तक भारत का ग्लोबल जी.डी.पी. में हिस्सा 25 प्रतिशत से घटकर मात्र एक प्रतिशत रह गया | उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कई वर्षों से भारत की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार आया है और ग्लोबल जी.डी.पी. में भारत का हिस्सा बढकर 2.2 प्रतिशत हो गया है | यदि सरकार भी इसके लिये उचित वातावरण प्रदान करे तो वृद्धि दर कई गुना तक बढ़ सकती है | उनके अनुसार इसके लिये सभी स्तर पर भ्रष्टाचार का उन्मूलन अति आवश्यक है | अंत में इस निष्कर्ष तक पहुंचते हुए उन्होंने कहा, “ हमारे पास उच्च तकनीक है और उसके प्रयोग के लिये मानव शक्ति भी है, लेकिन अगर किसी चीज की आवश्यकता है , तो वह है – उत्तम व्यवस्थापन | हमने जो पिछले 300 वर्षों में खोया है , उसे हम आने वाले 30 वर्षों में वापस प्राप्त कर सकते हैं |”

इससे पहले कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं बिट्स पिलानी के निदेशक प्रो. जी रघुरामा ने कहा कि हर वर्ष छात्रों में कॉन्क्वेस्ट के लिये उत्साह बढ़ता नजर आ रहा है | उभरते हुए उद्यमियों के लिये उन्होंने सन्देश दिया कि “ बड़ा सोचो , उच्च विचार रखो ,मगर उस पर कार्य अभी से आरम्भ कर दो |”
Tuesday, April 27, 2010
शिखर पर बिट्सियन्स : 2009-10
Tuesday, April 13, 2010
कुछ नवीनतम आयोजन पिलानी में
Sunday, April 4, 2010
अलविदा - आखरी नहीं !
'७४-'७९ से लेकर आजतक हर बिट्सियन पर राज करता यह नाम आज जीवन के बदलाव के साथ आगे बढ़ रहा है...
भले ही सर हमें पिलानी में न दिखें पर जैसा कि उन्होंने खुद कहा - "मैं यहाँ आता रहूँगा, कनॉट, ऐन्क, मंदिर.. यह सब जगह ज्यादा दूर नहीं है.. आप मुझे बिट्स से निकाल सकते हैं पर मेरे अन्दर से पिलानी को कभी नहीं !"
यह शब्द उस बिट्सियन के जिसने ३५ सालों तक लगातार और कुछ नहीं बस बिट्स ही देखा है और एक ही राह - पिलानी !
बिट्स के "साइबर पत्रकार" सही मायनों में रहे हैं वो जो कि अब से सबसे ज्यादा खलेगी..
सर को पूरे बिट्स परिवार की ओर से बहुत शुभकामनाएं अपने भावी जीवन के लिए और धन्यवाद एक अमूल्य योगदान के लिए..
सर श्रीधर महाविद्यालय के प्रति-उप कुलपति बनने जा रहे हैं जो कि पिलानी से सिर्फ १० की.मी. की ही दूरी पर है...
तो अगले मुलाक़ात तक के लिए हम सभी की तरफ से अलविदा जो कि कभी आखरी नहीं होगा..
Sunday, March 14, 2010
ए.एस.पिल्लई से मुलाकात
पेप द्वारा आयोजित अतिथि व्याख्यान में कल दोपहर ब्रह्मोस एरोस्पेस के सी.ई.ओ., एम.डी., ए.एस.पिल्लई ने LTC में छात्रों को मिसाइल क्षेत्र में भारत के अभियान के बारे में बताया |
उन्होंने बताया कि कैसे विकसित देश अपनी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके विकासशील देशों के तकनीकी विकास पर कड़ी निगरानी रखते हैं व उसमें अड़चनें पैदा करते हैं | उनके अनुसार भारत उन ग्यारह देशों में से एक है जिसके पास 1000 किमी से ज़्यादा परास (रेंज) की मिसाइल है | भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण किया है जो ध्वनि की गति से भी तेज चलने वाली, विश्व की एकमात्र मिसाइल है | और फिलहाल हाईपर-सोनिक मिसाइल का कार्य प्रगति पर है | ब्रह्मोस मिसाइल की गति, परिशुद्धता और उसकी अद्वितीय मारक क्षमता के कारण भारत इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बन गया है | उनके अनुसार मात्र 150 मिलियन डॉलर की लागत से बनी यह मिसाइल 10 बिलियन डॉलर का बिज़नेस कर रही है और आज इसकी मांग न सिर्फ अपने देश में बल्कि पूरे विश्व में है |
उनका मानना है कि भारत के युवाओं में वह शक्ति है जो कुछ भी करने में सक्षम है | एक बार अमेरिका ने भारत को सुपर-कम्प्यूटर देने से इंकार कर दिया था तो भारत ने अपने अथक परिश्रम से मात्र दो वर्षों में ही उससे भी बीस गुना ज़्यादा तेज़ सुपर-कम्प्यूटर का निर्माण किया | उनके विचार से भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लिये हमें एकजुट होकर प्रयत्न करना होगा | अन्त में छात्रों की जिज्ञासा को शांत करते हुए भारत के राष्ट्रगान के साथ उन्होंने अपना व्याख्यान समाप्त किया |
Saturday, March 13, 2010
मिथाली – 2010
Friday, March 12, 2010
मीरा एच सान्याल से मुलाकात
एक पेशेवर बैंकर होने के साथ ही सामाजिक कार्यों जैसे निर्धनता उन्मूलन, नारी सशक्तिकरण, जैव विविधता का संरक्षण आदि में अपनी भागीदारी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हर कार्य के लिए समय निकालना तो काफी मुश्किल होता है पर इन कार्यों में उनकी विशेष रूचि के कारण ये संभव हुआ | इन कार्यों को करने की प्रेरणा उन्हें परिक्रमा जैसे चंद NGOs में कार्यरत लोगों से मिलती है | नारी सशक्तिकरण हेतु माइक्रोफिनांस नामक पॅालिसी से गरीब और पिछड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति की पुरजोर कोशिश कर रही हैं | अब तक लगभग 6500 से भी ज्यादा महिलाएं इससे लाभान्वित हो चुकी हैं और करीब 50% से ज्यादा महिलाओं ने इस पॅालिसी को दुबारा अपनाया है | उनका मानना है कि माइक्रोफिनांस का मूल उद्देश्य बैंक के लिए पैसा बनाना नहीं अपितु हमारे देश में महिलाओं की आर्थिक स्तिथि को मजबूती प्रदान करना है | इसी तरह मीरा HIV(+) और नशे के आदी बच्चों के पुनर्वास से जुड़े कार्यों में भी अपना योगदान दे रही हैं | सतत विकास और विरासत के संरक्षण पर जोर देते हुए सान्याल ने हमें बताया की वो न सिर्फ मेलघाट और सुंदरवन लाइफलाइन जैसे प्रोजेक्ट्स पर कार्यरत हैं अपितु और भी ऐसे कई प्रोजेक्ट्स की तलास में हैं जिससे की नीचे तबके के लोगों को रोटी, कपडा और मकान मुहैया कराइ जा सके |
26/11 के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने काफी शिकायती लहजे में कहा कि वे सरकार द्वारा अपनाये गए रवैये से काफी अचंभित थी | अपने चुनाव लड़ने के बारे में उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि सरकार के काम करने के तरीके में कुछ बदलाव आये | यद्यपि वो चुनाव हार गयीं, पर उनका चुनावी अनुभव काफी अच्छा रहा |भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी कमजोरी के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था की कोई भी राजनेता (politician ) बुरा नहीं होता है और हर राजनेता अपने हिसाब से अच्छा काम करने की कोशिश ही करता है | पर सारी समस्याएँ यहाँ से शुरू होती हैं की जब हम ये चाहते हैं के किसी कंपनी का सीईओ शिक्षित, बुद्धिमान, कुशाग्र-बुद्धि तथा ज्ञानी हो तो हम अपने द्वारा चुने गए उम्मीदवारों के लिए ऐसा क्यों नहीं सोचते हैं, क्यों हम किसी अशिक्षित एवं आपराधिक पृष्टभूमि वाले व्यक्ति के हाथ में अपने देश की बागडोर सौंप देते हैं |देश की सबसे बड़ी ताकत आखिर अक्षम हाथों में क्यों ?
इस प्रश्न के जवाब में कि “भारतीय राजनीती को कैसे सुधार जा सकता है ?” उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं जिनके माध्यम से उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि हम :
- अपने अधिकारों का उपयोग करें |
- अपने सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाह करें |
- लोगों को उच्च स्तर की माँग करने की जरूरत है |
Tuesday, March 9, 2010
वर्ड वार्स

भाषा न सिर्फ संचार का माध्यम है, बल्कि मनुष्य के गौरव से मनुष्य की पहचान बन जाता है | परन्तु एक भाषा का दूसरी भाषा में अनुवाद या शाब्दिक शब्दार्थ से अर्थ का अनर्थ या फिर भाषा का सौन्दर्य कितना रोचक और हास्यप्रद हो सकता है, इसी अनुभूति का अनुभव कराने - अपोजी हिंदी प्रेस आयोजित कर रहा है अपनी पहली अपोजी प्रतियोगिता - वर्ड वार्स !
अपोजी से पहले लिए हुए क्लब डिपार्टमेंट और असोसिएशन के साक्षात्कार
नाम - राघव मिमानी
नाम - चंद्रिका माहेश्वरी
कार्यबल - 36
चन्द्रिका के अनुसार कंट्रोल्ज़ ने अपनी कार्यप्रणाली में काफी सुधार किये हैं | ये पहली बार होगा जब रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन होगा | पहले लोगों को चैक के ज़रिये ईनाम राशि प्राप्त करने में समस्या का सामना करना पड़ता था पर अब सीधा ईनाम राशि उनके खाते में स्थानांतरित हो जाएगी | इस बार ईनाम राशि को बढ़ाकर 11 लाख कर दिया गया है | अपोजी में दिनों की संख्या कम करने के बारे में उन्होंने कहा कि उद्घाटन ही सिर्फ शाम को रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग उसमें शामिल हो सकें | चंद्रिका के अनुसार 13 मार्च लोगों के आकर्षण का केंद्र होगा क्योंकि उस दिन बॉब (BOB) और टेडेक्स (TEDx) इवेंट्स हो रहे हैं | नये इवेंट्स में माइक्रोमाउस (micromouse) व कंट्रेपशन (contraption) से भी चन्द्रिका को काफी उम्मीदें हैं |
कार्यबल : 40
पेप के संयोजक सलिल गोयल ने बताया कि पेप अपोजी में पेपर प्रस्तुति , पोस्टर प्रस्तुति , साइबर फिएस्टा व् गेस्ट लेक्चर्स का आयोजन करा रहा है | पेपर प्रस्तुति के लिए आईं कुल 1100 प्रविष्टियों में से 350 का चयन किया गया है | साइबर फिएस्टा एक राष्ट्रीय स्तर की सॉफ्टवेयर निर्माण प्रतियोगिता है जो किसी विषय विशेष तक सीमित नहीं है | इस वर्ष की पोस्टर प्रस्तुति प्रतिस्पर्धा का शीर्षक 'प्लानिंग फॉर इंडियास अर्बन मिलियन’ है जो कि IYCM (International Youth Climate Movement) द्वारा प्रस्तुत किया गया है | गत वर्ष की सफलता को देखते हुए इस बार भी गेस्ट लेक्चर्स का आयोजन किया जा रहा है | इस बार कुल 7 वक्ताओं का आना सुनिश्चित हो चुका है जिनमें अर्चना शर्मा , ए.एस. पिल्लई , सतीश झा इत्यादि जैसे सुप्रसिद्ध लोग सम्मिलित है | इनमें से प्रमुख अर्चना शर्मा को बताया जा रहा है जो CERN में कार्यरत हैं | अगर संभव हुआ तो वे बिट्स के छात्रों व शिक्षकों को CERN में काम करने का सुअवसर उपलब्ध करवाने में भी दिलचस्पी रखती हैं
कहाँ मिलेंगे - रिसेप्शन बूथ
सदस्य - 22
डिपार्टमेंट - पैप (P.A.P.)
कार्यबल - 46
Sunday, March 7, 2010
Monday, February 15, 2010
एक सवाल आपसे
अगर गौर नही किया तो गौर कीजिये| आपके कॉलेज की वार्षिक पत्रिका का 2009 का अंक चंद आंकड़ों का मोहताज था| कल्पना कीजिये, हमारा गौरवशाली कॉलेज, उसकी उपलब्धियां और पता नही क्या क्या? और महसूस कीजिये हकीकत को, कि ऐसे संस्थान की वार्षिक पत्रिका कुछ महीनों पहले तक अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रही थी| अगर आप जानना चाहते हैं कि इसकी वजह क्या है, तो वो वजह हैं आप| आप और आपका वो उदासीन रवैया जिसकी वजह से आपने अपने आप को एक दायरे में सीमित कर दिया है|
किसी के gtalk status में लगी हुई कोइ लिंक पढ़ने में आपको कोई हिचक नही है,भले ही वो हिंदी में हो,लेकिन वही बात अगर आपके हाथ में हिंदी पत्रिका की हो, तो आपके माथे पर सलवटें पड़ जाती हैं| अपनी बात कहने के लिए आप ब्लॉग, फेसबुक का प्रयोग करते हैं, लेकिन हिंदी में कुछ लिख कर देना आपकी शान के खिलाफ है, आखिर क्यों? क्यों आपको बात करते वक्त हिंदी बोलना या sms में हिंदी लिखते वक्त शर्म नही आती, लेकिन हिंदी लिखना या पढ़ना आपके लिए शर्म की बात हो गयी है?
ऐसा क्यों है की कोई अंग्रेजी पत्रिका पहली बार पढ़ने में आप हिचकते नहीं| उसे पढते हैं, कुछ असभ्यताओं की आलोचना भी करते हैं, दोस्तों से विचार भी बाँटते हैं| लेकिन किसी हिंदी किताब की बात हो, तो साँप सूंघ जाता है| अब वाणी को ही ले लीजिए, कितने कम लोगों को पता था की 'वाणी' भी हमारे कॉलेज की वार्षिक पत्रिका है, और उसका वही स्थान वही दर्जा होना चाहिए जो किसी अन्य प्रकाशन का हो|
देखिये मैं हिन्दी भाषा के लिए आन्दोलन नहीं कर रही हूँ, न ही ऊपर लिखी किसी भी बात के खिलाफ हूँ| मैं सिर्फ ये कहना चाहती हूँ की हम लोग अपनी एक पहचान को खोने की कगार पर हैं और यह गलत है, अगर हम इस दिशा में कोई कदम न उठायें|
वाणी- 2010 के लिए अपना योगदान दें और उसे अपना वही स्थान पुनः पाने में सहयोग करें| एक और नम्र निवेदन उन सभी लोगों से जिनहोने वाणी-2009 पढ़ी| अपनी प्रतिक्रिओं और विचारों से हमे अवगत कराएं| हमें बताइए अगले अंक से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं, और आप क्या परिवर्तन देखना चाहते हैं| उम्मीद है आप अपनी उस "वाणी" को मौन नही होने देंगे|
-हिना जैन
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